August 29, 2025
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सतयुग दर्शन संगीत कला केंद्र वसुंधरा द्वारा *मातृ दिवस के उपलक्ष में सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन* किया।
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सतयुग दर्शन संगीत कला केंद्र वसुंधरा द्वारा *मातृ दिवस के उपलक्ष में सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन* किया।

 

सतयुग दर्शन संगीत कला केंद्र वसुंधरा द्वारा *मातृ दिवस के उपलक्ष में सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन* किया।

दिनांक 9 मई 2022 को सतयुग दर्शन संगीत कला केंद्र वसुंधरा द्वारा मातृ दिवस का आयोजन किया गया यह दिवस पूर्ण रूप से सभी माताओं के नाम रहा वैसे तो हर दिन उन्हीं का दिन है ।
जिसमें सतयुग दर्शन संगीत कला केंद्र के प्रधानाचार्य श्री दीपेंद्र कांत ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। कार्यक्रम के शुरुआत में साडा है सज्जन राम-राम है कुल जहान द्वारा इस कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। जैसा कि इस मंत्र का अर्थ है कि ईश्वर हमारा मित्र प्रियतम सर्व व्यापक है उसी को जानो मानो और वैसे गुण अपनाओ। अतः हर व्यक्ति में उस ईश्वर को देखना है, जनचर बनचर, कण-कण में उस ईश्वर को देखना है। इस मंत्र के माध्यम से सभी बच्चों को संदेश दिया। साथ ही कला केंद्र के शिक्षकों द्वारा एक समूह गीत प्रस्तुत किया गया यह गीत मातृशक्ति को समर्पित रहा । इस गीत के माध्यम से सभी बच्चों में माता के प्रति आदर भाव, सम्मान का भाव पनपेगा।
कार्यक्रम के मध्य में विद्यार्थी विकास द्वारा सिंथेसाइजर पर राग वृंदावनी सारंग प्रस्तुत किया गया। यह राग बजाकर अपनी प्रस्तुति अपनी मां को समर्पित की और प्रण लिया कि आज से हर माता और बहन के प्रति सम्मान की भावना उनके दिल में जागृत रहेगी।

कार्यक्रम के अंत में प्रधानाचार्य दीपेंद्र कांत ने सभी बच्चों को संदेश दिया कि इस संसार में हमें और कोई निस्वार्थ प्रेम नहीं कर सकता मां का प्रेम निस्वार्थ होता है। हर साल मई के दूसरे रविवार को मातृ दिवस मनाया जाता है इस दिन मां के सम्मान में सभी मां के लिए कुछ ना कुछ समर्पित करते हैं।अतः मेरा आप सभी विद्यार्थियों से निवेदन है कि आपके मन में हर मां के प्रति सम्मान हो, हर उस बहन के प्रति सम्मान हो, हर नारी के प्रति सम्मान की भावना हो। ऐसा यदि हम अपनाते हैं तो यह समाज, यह देश बेहतर बन सकता है। हमारे जीवन में मां का स्थान सर्वोपरि माना गया है। मां के लिए यह भी कहा गया है कि मां हमारे जीवन की सर्वप्रथम गुरु होती है। मां के लिए मैं दो पंक्तियां प्रस्तुत करना चाहूंगा कि मां अगर तुम ना होती तो मुझे समझाता कौन? कांटो भरी इस मुश्किल राह पर चलना सिखाता कौन?
मां अगर तुम ना होती तो मुझे लोरी सुनाता कौन ?
खुद जागकर सारी रात चैन की नींद सुलाता कौन?
मां अगर तुम ना होती तो मुझे चलना सिखाता कौन?
मां तुम सर्वोपरि हो मां तुम सर्वोपरि हो ।।
मंच संचालन संगीत विभाग के विभागाध्यक्ष पंडित केशव शुक्ला एवं मिस्टर संजय बिडलान ने किया। साथ ही कार्यक्रम की तैयारी अतिथियों का स्वागत रुपाली वैश एवं विद्यार्थियों ने किया
धन्यवाद ज्ञापन के बाद कार्यक्रम का समापन हुआ।।

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