देश के सुप्रसिद्ध शिक्षाविद समाजशास्त्री दार्शनिक प्रोफ़ेसर एम पी सिंह ने बताया कि श्री गुरु हरगोबिंद साहिब जी ने ग्वालियर के किले से 52 हिंदू राजपूत राजाओं को 400 साल पहले मुगल बादशाह जहांगीर की कैद से रिहा कराया था रिहा कराने के बाद जब गुरुजी अमृतसर साहिब में पहुंचे तो सिक्कों ने अकाल पुरख का शुक्रिया किया और देसी घी के दीए जलाकर खुशी प्रकट की उस समय से सिखों में दीपावली का त्यौहार बंदी छोड़ दिवस के रूप में बड़ी श्रद्धा भाव से मनाया जाता है
डॉ एमपी सिंह ने बताया कि ग्वालियर के किले पर गुरु साहेब की कृपा से और संगत के सहयोग से बाबा उत्तम सिंह जी कार सेवा खडूर साहेब वालों ने 1968 ईस्वी में संगत के कहने पर प्रारंभ की थी जो आज के समय केंद्रीय भारत की सिख संगत का अहम केंद्र है इस साल भी अकाल तख्त साहिब जी के आदेशों के अनुसार 400 साल बंदी छोड़ दिवस शताब्दी गुरुद्वारा दाता बंदी छोड़ किला ग्वालियर में चार पांच और 6 अक्टूबर को संपूर्ण खालसा पंथ द्वारा बहुत उच्च स्तर और उत्साह के साथ मनाया गया और 23 अक्टूबर को इस शताब्दी को समर्पित शुभकामनाओं और मंगल कामनाओं का प्रतीक नगर कीर्तन गुरुद्वारा दाता बंदी छोड़ किला ग्वालियर मध्य प्रदेश से आरंभ हुआ
यह नगर कीर्तन आगरा फरीदाबाद दिल्ली करनाल फतेहगढ़ साहिब लुधियाना और करतारपुर जालंधर आदि शहरों में पड़ाव करता हुआ 3 नवंबर शाम को श्री अकाल तख्त साहिब पहुंचेगा जिसके तहत 28 अक्टूबर को सेक्टर 15 के गुरुद्वारे में सभी के रात्रि ठहराव की व्यवस्था की गई और 29 अक्टूबर की सुबह बड़े ही मान सम्मान के साथ सिख संगत को रवाना किया गया जिसकी जलपान की व्यवस्था सेक्टर 16 गुरुद्वारे की प्रबंधन कमेटी के सरदार टोनी पहलवान सरदार कुलदीप सिंह साहनी सरदार नर बिंदर सिंह सरदार महेंद्र सिंह सरदार गुरमीत सिंह सरदार कल्याण सिंह सरदार सुखबीर सिंह सरदार सुनील किनरा ने बड़े ही श्रद्धा भाव से किया और सरोपा भेंट कर स्वागत व सम्मान किया
इस कार्यक्रम में स्थानीय जिला और पुलिस प्रशासन की अहम भूमिका रही इस अवसर पर कोविड-19 के कोऑर्डिनेटर डॉ एमपी सिंह ने उत्तम स्वास्थ्य रखने हेतु कोरोना प्रोटोकॉल की जानकारी दी और शांति सद्भाव बनाए रखने के लिए प्रोत्साहित किया