August 29, 2025
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फरीदाबाद। भोपानी लालपुर रोड पर स्थित विशाल परिसर ‘वसुन्धरा’ सतयुग दर्शन संगीत कला केन्द्र ने दिनांक २४ अप्रेल को “शास्त्रीय संगीत बैठक का आयोजन किया।
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फरीदाबाद। भोपानी लालपुर रोड पर स्थित विशाल परिसर ‘वसुन्धरा’ सतयुग दर्शन संगीत कला केन्द्र ने दिनांक २४ अप्रेल को “शास्त्रीय संगीत बैठक का आयोजन किया।

फरीदाबाद। भोपानी लालपुर रोड पर स्थित विशाल परिसर ‘वसुन्धरा’ सतयुग दर्शन संगीत कला केन्द्र ने दिनांक २४ अप्रेल को “शास्त्रीय संगीत बैठक का आयोजन किया।
जिसमें बनारस घराने के विश्व विख्यात बांसुरी वादक पण्डित अजय प्रसन्ना जो कि 3 बार ग्रैमी अवार्ड के लिए नोमिनेट हो चुके हैं साथ ही तबले पर संगत के लिए रेडियो एवम दूरदर्शन कलाकार पन्डित प्रदीप सरकार ने सबका मन मोह लिया।
कार्यक्रम का शुभारम्भ सतयुग दर्शन ट्रस्ट के मार्गदर्शक श्री सजन जी, मैनेजिंग ट्रस्टी श्रीमती रेशमा गांधी जी एवम चेयरपर्सन
श्रीमती अनुपमा तलवार जी ने सभी अतिथियों के साथ दीप प्रज्ज्वलन कर किया।

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कार्यक्रम के शुभारम्भ में
सतयुग दर्शन संगीत कला केन्द्र के विद्यार्थियों द्वारा राग
वृन्दावनी सारंग पर आधारित स्वागत गीत प्रस्तुत किया गया। संगीत कला केन्द्र के अध्यापक व अध्यापिकाओं ने कत्थक, भरत नाट्यम व गायन में अपने अपने कार्यक्रम प्रस्तुत कर सभी का मन मोह लिया।
इस अवसर पर सतयुग दर्शन संगीत कला केन्द्र की चेयरपर्सन श्रीमती अनुपमा तलवार, जो कि स्वयं भी एक उच्च कोटि की गायिका एवं नृत्यांगना हैं, ने बताया यह संगीत कला केन्द्र वसुन्धरा, फरीदाबाद के अतिरिक्त गुड़गाँव, जालन्धर शहर, अम्बाला
कैन्ट, सहारनपुर, पानीपत, रोहतक, दिल्ली, लुधियाना इत्यादि में भी हैं ।साथ ही यह
भी बताया कि संगीत कला केन्द्र प्रयाग संगीत समिति, इलाहाबाद, जो कि सन् 1926 से संगीत शिक्षा के क्षेत्र में कार्यरत देश की सबसे प्राचीन शिक्षण संस्था है, से मान्यता प्राप्त है। सतयुग दर्शन संगीत कला केन्द्र में प्रयाग संगीत समिति के प्रवेशिका कोर्स से लेकर संगीत प्रभाकर डिग्री कोर्स के लिए शिक्षण व्यवस्था का समुचित प्रबन्ध है।
यहाँ संगीत की तीनों विधाओं अर्थात् गायन, वादन व नृत्य में शिक्षा प्रदान की जाती है। शिक्षण के लिए प्रशिक्षित अध्यापक हैं।
कार्यक्रम में पधारे सतयुग दर्शन ट्रस्ट के मार्गदर्शक श्री सजन जी ने कहा कि सर्वप्रथम हम यह बताना चाहेंगें कि संगीत-विद्या का प्रयोग आदिकाल अर्थात् वैदिक काल से ही सुदृढ संस्कृति स्थापना हेतु किया जाता रहा है। यह पद्धति मानवता संविधान के अनुकूल हर सजन के मन, रूचि, आचार-विचार, कला-कौशल को युक्तिसंगत निपुणता प्रदान कर हर समयकाल में सभ्यता के क्षेत्र में बौद्धिक विकास की सूचक रही है क्योंकि तत्कालिन संगीत लय, ताल, नृत्य आदि सब में चेतना/मन को जाग्रत करने की अद्भुत क्षमता थी जो मनुष्य की मानसिक स्थिति को सम में सुदृढ रखती थी।
कहने का तात्पर्य यह है कि तब का संगीत दिव्य मार्ग प्रशस्त करने का अर्थात् परमानन्द तक पहुँचाने का सर्वश्रेष्ठ साधन था तथा शाश्वत ध्वनि से उत्पन्न हुआ माना
जाता था। वह अखण्ड और अटूट था तथा सभी संगीत को जीवन में स्पंदन रूप से चेतना का प्रतीक मानते थे। अर्थात् संगीत प्रणव-वाचक, ओ३म रूपी नाद ब्रह्म कहलाता था। तभी इस कला को उस काल में सब आत्म-मार्ग का सर्वोच्च निर्देशक मानते थे और यह हृदय को निर्मल बनाने व मानव स्वास्थ्य की रक्षा करने के साधन के रूप में जाना जाता था। संक्षेपतः हम कह सकते हैं कि वह संगीत धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति का प्रदायक भी था और स्वर समाधि द्वारा ब्रह्मलीन होने का माध्यम भी।
हम सबको व समस्त संगीतज्ञयों व विद्वानों को एक मूकदृष्टा की भांति मानवता को पतनता की तरफ जाते हुए नहीं देखना चाहिए अपितु अपनी योग्यता, गुण प्रतिभा का प्रयोग सच्चरित्रता व नैतिकता के मूल्यों को स्थापित करने की तरफ लगाना चाहिए।
इन्हीं तथ्यों को मध्य नजर रखते हुए संगीत के माध्यम से मनुष्य की शारीरिक, मानसिक व आत्मिक स्वस्थता के उत्थान के लिए सतयुग दर्शन संगीत कला केन्द्र की स्थापना आवश्यक समझी गई है। आज का कार्यक्रम सबके अन्दर एक नयी ऊर्जा का संचार करेगा।

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प्रधानाचार्य दीपेंद्र कांत ने सभी अतिथियों का धन्यवाद ज्ञापन
करते हुए बताया कि यह शास्त्रीय संगीत की बैठक सतयुग दर्शन
वसुंधरा हैड ऑफिस से प्रारंभ हुई है और प्रतिमाह इस प्रकार की
बैठक हर शहर में जहां पर भी सतयुग दर्शन संगीत कला केंद्र
कार्यरत हैं वहां पर आयोजित की जाएंगी इससे शिक्षा प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों के अंदर एक नई ऊर्जा व संगीत के प्रति रुझान बढ़ेगा क्योंकि इस प्रकार के कलाकार जब अपनी प्रस्तुति देते हैं तो बच्चों के अंदर वैसा ही बनने की लग्न और स्फूर्ति पैदा होती है अतः इस कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों के अंदर रुचि उत्पन्न करना है अतः इस प्रकार के कार्यक्रम प्रतिमाह सभी संगीत कला केंद्र में आयोजित किए जाएंगे।
अतिथियों में पधारे श्री आर पी हंस डायरेक्टर लोक उत्थान क्लब, पंडित देवेंदर वर्मा जी डायरेक्टर राष्ट्रीय संगीतज्ञ परिवार , सुमिता दत्ता जी चीफ कोऑर्डिनेटर फॉर स्कूल्स इन स्पीक मैके, डॉक्टर भूपेंद्र मल्होत्रा जी प्रोफेसर नेहरू कॉलेज, श्री मनीष त्रिखा जी, मिसिज सपना सूरी हेड रेडियो महारानी, चंदन मेहता डायरेक्टर प्रोड्यूसर सिनेमा, नीरज मोहनपुरी एवं विभिन्न संगीत कला केंद्रों के केंद्र व्यवस्थापक एवं सदस्य उपस्थित रहे।

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