*प्रत्येक मानव के भविष्य निर्माता-शिक्षक*
*बिना शिक्षक बनता नहीं,
जग में कोई महान।
शिक्षक ही है डालता,
मृत सपनों में जान।।*
आज शिक्षक दिवस के शुभ अवसर पर सतयुग दर्शन संगीत कला केन्द्र की ओर से ” *शिक्षक दिवस*” की हार्दिक शुभ कामनाएं।
जीवन का प्रत्येक दिन शुभ हो उसकी नींव अभिभावक व शिक्षक ही रखते हैं। प्रत्येक सफलता का रहस्य किसी ना किसी रूप में शिक्षक ही होते हैं।
इंसान को योग्य जीवन जीने की सीख ज्ञान ही देता है। जिस प्रकार एक शिल्पकार पत्थर को
को आकार देता है और कच्ची मिट्टी को तपाकर उसके विकारों को दूर करता है। ठीक उसी
प्रकार एक शिक्षक भी छात्रों के अवगुणों को दूर कर काबिल बनाता है। शिक्षक ज्ञान का वह
अविरल स्रोत है, जो लाखों छात्रों के भाग्य का निर्माण करता है। वह ज्ञान का एक ऐसा भंडार
भंडार है, जो दूसरों को बनाने में स्वयं मिट जाता है। कहा जाता है कि, एक बच्चे के जन्म के बाद उसकी मां पहली गुरू होती है, जो अक्षरों का बोध कराती हैं। वहीं दूसरे स्थान पर शिक्षक होते हैं, जो हमें काबिल बनाते हैं और सांसारिक बोध कराते हैं। जिंदगी के इम्तिहान में शिक्षकों के सिखाए गए सबक हमें सफलता की बुलंदियों पर ले जाते हैं। प्राचीन काल से ही गुरुओं का हमारे जीवन में विशेष योगदान रहा। भारत में प्रतिवर्ष शिक्षकों
के सम्मान में 5 सितंबर को शिक्षक दिवस मनाया जाता है। इस दिन शिक्षकों को समाज के विकास में उनके अनकहे योगदान के लिए सम्मानित किया जाता है।
देश के पहले उपराष्ट्रपति और दूसरे राष्ट्रपति डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्म जयंती के
उपलक्ष्य में शिक्षक दिवस मनाया जाता है। 1962 में जब डॉ. साहब ने भारत के दूसरे राष्ट्रपति के रूप में पद ग्रहण किया, तब उनके कुछ मित्र, शिष्य और सगे संबंधी उनका जन्मदिवस मनाने के लिए उनके पास आए और उनसे अनुरोध किया कि वो उन्हें जन्मदिन मनाने की अनुमति दें। लेकिन डॉ. साहब की सादगी ने यहां भी सबको मोहित कर दिया।
उन्होंने कहा कि मेरे जन्मदिवस को अलग से मनाने के बजाए, इस दिन को शिक्षक दिवस के
के रूप में मनाएं। यही कारण है कि प्रत्येक वर्ष 5 सितंबर को शिक्षक दिवस मनाया जाता है।
है।
आइए गर्व से कहें कि हम भविष्य निर्माता हैं, हम शिक्षक हैं। आज प्रण लें कि हम आगामी कल को सुनहरा बनाने के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर कर, देश को सर्वोच्च शिखर पर ले जाने के लिए ईमानदारी से अपनी जिम्मेदारी निभाएंगे और प्रत्येक दिन शिक्षक को याद किया जाए ऐसा कर दिखाएंगे।
दीपेंद्र कांत
प्राचार्य
सतयुग दर्शन संगीत कला केन्द्र