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वेशभूषा देती है चरित्र को पहचान – रंगमंच कार्यशाला

हरियाणा कला एवं सांस्कृतिक कार्य विभाग के सहयोग से आयोजित हो रही 20 दिवसीय कार्यशाला में प्रतिभाग कर रहे बच्चे उत्साहित हैं। कार्यशाला में शामिल बच्चे अपने समय का सदुपयोग करते हुए रंगमंच की बारीकियां सीखते हुए एक्टिंग से जुड़े अलग-अलग पहलुओं के बारे में भी सीख रहे हैं। अपने चेहरे के हाव-भाव, शरीर के अंगों का अभिनय में योगदान, आवाज़ की भूमिका के साथ ही आज बच्चों ने जाना कि किस तरह से वेशभूषा यानि काॅस्ट्यूम किसी चरित्र को पहचान देने में अपनी भूमिका निभा सकती है।

उन्होंने जाना कि किसी भी चरित्र की पहली पहचान उसकी वेशभूषा से हो सकती है। इसके साथ ही किसी एक कपड़े को अलग-अलग तरीकों से प्रयोग करके निभाए जा रहे चरित्र को महत्वपूर्ण बनाया जा सकता है। कपड़ों के रंग भी अलग-अलग भावों को प्रकट करते हुए चरित्र में निखार ला सकते हैं। इसके साथ ही बच्चों ने अपने साथ लाए कपड़ों से अलग-अलग चरित्रों का अभिनय करके भी दिखाया। किसी बच्चे ने सिर पर कपड़ा बांध कर दूध वाले का, तो किसी ने कमर पर बांध कर कृष्ण भगवान का किरदार निभाया। कोई उसी कपड़े को सिर पर ओढ़ कर बहरूपिया तो कोई गले में डाल कर अंग्रेजी बाबू का किरदार निभाने की कोशिश कर रहा था।

कार्यशाला में प्रतिदिन शाम 05ः30 से 07ः30 बजे तक प्रतिभाग कर रहे बच्चे नाटक के अलग-अलग गुर सीख रहे हैं। इसके साथ ही वह आज़ादी का अमृत महोत्सव के उपलक्ष्य में होने वाले नाटक “आज़ादी – एक सच” की भी तैयारी करेंगे, जिसमें सभी बच्चे अलग-अलग भूमिकाएं निभाएंगे। कार्यशाला के सह-निर्देशक दीपक पुष्पदीप तथा निर्देशक और संयोजक डाॅ0 अंकुश शर्मा हैं। उन्होंने बताया कि 4 जून तक आयोजित होने वाली इस कार्यशाला में अलग-अलग आयु वर्ग के लगभग 25 बच्चे प्रतिभाग कर रहे हैं।

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