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नाट्य कार्यशाला में बच्चों ने जाना वाचिक अभिनय का महत्व

नाट्य कार्यशाला में बच्चों ने जाना वाचिक अभिनय का महत्व

बाल सुधार गृह प्लेस ऑफ सेफ़्टी में आयोजित की जा रही 15 दिवसीय नाट्य कार्यशाला में प्रतिभाग कर रहे लगभग 25 बच्चों ने आज आवाज़ और उसके उच्चारण के बारे में जानकारी ली। इस कार्यशाला के निर्देशक दीपक पाल सिंह ने बच्चों को वाचिक अभिनय के सम्बन्ध में बताते हुए आवाज़ से जुड़े हुए कई व्यायाम कराए। बच्चों ने जाना कि हम किस तरह से वाचिक अभिनय के अंतर्गत अपनी आवाज़ का सही प्रयोग करते हुए जीवन में सफलता हासिल कर सकते हैं।
आज़ादी के अमृत महोत्सव के उपलक्ष्य में आयोजित हो रही रंगमंचीय कार्यशाला में बच्चों ने नाट्य खेलों एवं गतिविधियों के ज़रिये अलग-अलग आवाज़ों में अपने भाव भी सामने रखे। इस कार्यशाला में प्रतिभाग कर रहे प्लेस ऑफ सेफ्टी के इच्छुक बच्चे अभिनय की बारीकियों के साथ ही जीवन मूल्यों से जुड़ी बातें भी सीखेंगे, जिनका लाभ वह यहां से बाहर निकल कर अपने जीवन में भी कर सकेंगे।

हरियाणा कला परिषद के सहयोग से इस कार्यशाला का आयोजन फोर्थ वाॅल प्रोडक्शंस द्वारा किया जा रहा है। बाल सुधार गृह के इंचार्ज प्रमोद शर्मा ने आशा जताई कि इस कार्यशाला से बच्चों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आएंगे, जिनका उपयोग करते हुए वह सफल नागरिक बन पाएंगे।

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