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“बेबी” नाटक में बयान की स्त्री के संघर्ष की दास्तां

फ़रीदाबाद थियेटर फेस्टिवल के तीसरे दिन बेबी नाटक ने स्त्री के संघर्ष की दास्तां बयान की। इस कहानी में एक बेबस महिला के जीवन और उसके संघर्षों को दिखाने के साथ ही नारी सम्मान और सशक्तीकरण का संदेश भी दिया गया। फोर्थ वाॅल प्रोडक्शंस द्वारा आयोजित इस चतुर्थ रंग महोत्सव में हुए इस नाटक ने दर्शकों को झकझोर कर सोचने पर मजबूर कर दिया।

नाटक के कथानक के अनुसार बेबी एक एक ऐसी महिला है, जिसे पितृसत्तात्मक व पुरुष प्रधान मानसिकता वाले समाज में कदम.कदम पर शोषण का शिकार होना पड़ता है। वह फिल्मों में साइड आर्टिस्ट का काम करती है। वह बहुत से नॉवेल पढ़ती है, जिससे वह उन उपन्यासों के चरित्रों से प्रभावित होकर उन चरित्रों जैसा ही जीवन जीने की आकांक्षा रखती है। वह जिस झुग्गी में रहती है उसका मालिक शिवप्पा एक गैंगस्टर किस्म का क्रूर व्यक्ति है, जो बेबी का आए दिन शोषण करता है। इस बात का पता उसके भाई राघव को चलता है तो वह भाई को भी प्रताड़ित करता है और उसे पगलखाने में भिजवा देता है। छह साल पश्चात जब राघव पागलखाने से छूटकर आता है तो वह बहन के पास रहना चाहता है लेकिन बेबी उसको मना करती है कि अगर शिवप्पा को पता चल गया तो परेशानी हो जाएगी। जिद करने पर वह राघव को अपने पास रहने देती है। शिवप्पा बेबी का शारीरिक व मानसिक शोषण जारी रखता है। इसी दौरान उसका संपर्क एक कर्वे नाम के व्यक्ति से होता है, जो उसे फिल्म स्टार बनाने के सब्जबाग दिखाता है। बेबी उसको मददगार समझती है लेकिन वह भी उसका शोषण ही करता है। नाटक के अंत में शिवप्पा बेबी के साथ मारपीट कर रहा होता है, तभी राघव शिवप्पा को गला घोट कर मार देता है।

बेबी नाटक दिल्ली की नाट्य वेद संस्था ने कृष्णा राज के निर्देशन में किया, जिसमें बेबी की भूमिका तनु सुनेजा ने निभाई। इस महोत्सव के संयोजक डाॅ0 अंकुश शर्मा ने बताया कि सोमवार को इस महोत्सव का समापन विश्व रंगमंच दिवस के अवसर पर दिल्ली की ड्रामाटर्जी थियेटर ग्रुप द्वारा 12 एंग्री मैन नाटक का मंचन किया जाएगा।

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