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पर्यटकों पर अपनी कला की छाप छोड़ रहे हैं मेघालय के शिल्पकार

-थीम स्टेट मेघालय द्वारा 39 वें सूरजकुंड अंतर राष्ट्रीय शिल्प मेले में लगाई गई हैं चार दर्जन से अधिक स्टालें - बांस और बेंत से बनी मेघालय की शिल्प वस्तुएं लोगों को अपनी ओर कर रही लुभाविंत -सूरजकुंड मेला में स्टाल लगाने का अवसर प्रदान करने पर मेघालय के शिल्पकारों ने जताया मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह का आभार

फरीदाबाद, 02 फरवरी।
सूरजकुंड में आयोजित हो रहे 39वें अंतरर्राष्ट्रीय आत्मनिर्भर शिल्प मेले में थीम स्टेट के रूप में आमंत्रित मेघालय राज्य के शिल्पकार यहां आने वाले पर्यटकों ध्यान अपनी ओर आकर्षित कर रहे हैं। शिल्प मेला के तीसरे दिन सोमवार को मेघालय की बांस और बेंत की टोकरियाँ, चटाइयाँ, मोमबत्तियाँ और बेंत के फर्नीचर की लगाई गई चार दर्जन स्टालों पर पर्यटकों की खासी चहल कदमी रही। वहीं दूसरी तरफ स्टाल लगाने वाले मेघालय के शिल्पकारों ने उनको अपने हुनर का अंतर राष्ट्रीय पटल पर प्रदर्शन करने का अवसर देने के लिए हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह और विरासत एवं पर्यटन विभाग के मंत्री अरविंद शर्मा का आभार जताया है।
उल्लेखनीय है कि 31 जनवरी से शुरू हुए सूरजकुंड अंतर्राष्ट्रीय आत्मनिर्भर शिल्प मेले में देशभर के विभिन्न राज्यों के अलावा 50 से अधिक देश प्रतिभागी बने हैं। अलग अलग राज्यों से आए शिल्पकारों द्वारा स्टॉल लगाकर अपनी शिल्प का प्रदर्शन किया जा रहा है। हरियाणा सरकार के आमंत्रण पर अबकी बार मेघालय व उत्तर प्रदेश थीम राज्य बने हैं।

थीम स्टेट के रूप में शामिल हुए मेघालय सरकार द्वारा निर्मित जैविक मसाले और खाद्य, पारंपरिक वस्त्र व आभूषण के तहत शिल्प मेले में करीब चार दर्जन से अधिक स्टॉल लगाई गई हैं। इन स्टॉलों में मुख्य रूप से खासी जनजातीय शॉल, जैंतिया टोपी, और गारो परिधान, लाकडोंग हल्दी, जंगली शहद, काली मिर्च और अदरक  और पायला आभूषण के साथ-साथ बांस और बेंत की टोकरियाँ, चटाइयाँ, मोमबत्तियाँ और बेंत के फर्नीचर आदि मुख्य आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं। मेले के तीसरे दिन सभी स्टॉलों पर पर्यटकों की खासी भीड़ देखने को मिली और मेघालय के शिल्पकारों द्वारा बनाई गई वस्तुओं की खरीदारी व जानकारी लेने  का उत्साह नजर आया है।
मेघालय के शिल्पकार जोशांदा मेरी ने हरियाणा सरकार द्वारा यहां स्टॉल लगाने का अवसर प्रदान किए जाने पर मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह का आभार जताते हुए बताया कि वे पिछले 10 दसकों से कार्य कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि लोकल टू ग्लोबल थीम के साथ हमें यहां अपनी नई पहचान बनाने का अवसर भी मिला है।

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