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भारत ट्यूलिप पवेलियन से मिल रहा शिल्पकारों को वैश्विक मंच

-लोकल टू ग्लोबल मंत्र से शिल्पकार बन रहे आत्मनिर्भर

फरीदाबाद, फरवरी।
39 वें अंतरराष्ट्रीय आत्मनिर्भर शिल्प मेले में इस वर्ष सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के तत्वावधान में स्थापित भारत ट्यूलिप पवेलियन पर्यटकों और खरीदारों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। यह पवेलियन विरासत से वैश्विक बाजारों तक के विजन पर आधारित है। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय का मुख्य उद्देश्य शिल्पकारों को बिना किसी बिचौलियों के सीधे बाजार और डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ना है।

भारत ट्यूलिप में श्यामावती ने लगाई मिट्टी से बने उत्पाद की स्टॉल
भारत ट्यूलिप पवेलियन में फरीदाबाद की स्थानीय शिल्पकार श्यामावती द्वारा स्टॉल नम्बर 503 लगाई गई है, जो मिट्टी के बर्तनों के कारण आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। उनकी स्टॉल पर मिट्टी से बनी कढ़ाई, पानी की बोतलें और अन्य रसोई उत्पादों का विस्तृत संग्रह मौजूद है, जो पर्यावरण के अनुकूल जीवन शैली को बढ़ावा दे रहे हैं। शिल्पकार श्यामावती ने बताया कि मिट्टी के बर्तन में खाना बनाना स्वास्थ्य के लिए अत्यधिक फायदेमंद है, क्योंकि यह भोजन में कैल्शियम, फास्फोरस, आयरन और मैग्नीशियम जैसे खनिजों को जोड़ता है और पोषक तत्वों को सुरक्षित रखता है। मिट्टी की क्षारीय प्रकृति भोजन के एसिड को बेअसर करती है, जिससे पाचन में सुधार होता है और तेल का भी कम उपयोग होता है।

कारीगरों की आजीविका को बढ़ा रहा भारत ट्यूलिप
         सूरजकुंड मेले में विभिन्न राज्यों के कारीगरों को एक मंच प्रदान कर यह मिशन न केवल उनकी कला को जीवित रख रहा है, बल्कि उनकी आजीविका में भी सकारात्मक सुधार ला रहा है। भारत ट्यूलिप पवेलियन भारतीय पारंपरिक कला को आधुनिक बाजार की जरूरतों के अनुरूप ढालने का एक बेहतरीन उदाहरण पेश कर रहा है। इसके साथ ही कारीगरों की आजीविका को बढ़ा रहा है।

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