रंगकर्मी ज्योति संग स्मृति नाट्य उत्सव के पहले दिन आखरी सच नाटक ने खोली सच की परतें

″दुनिया के सारे सच यकीन पर खड़े होते हैं। आप यकीन करके देखिये सच अपने आप बन जाता है वर्ना सच अपने आप में कुछ होता ही नहीं है।″
″वह पत्थर की गुड़िया से प्यार करती हैए मंदिरों में जाकर पत्थर की मूर्तियों को नहलाती.धुलाती नहींए मस्जिद में चादर नहीं चढ़ाती।″
दर्शकों का झकझोरने वाले यह संवाद फोर्थ वाॅल प्रोडक्शंस द्वारा प्रस्तुत चतुर्थ हरियाणा रंग उत्सव के पहले दिन दीपक पुष्पदीप के निर्देशन में हुए नाटक आखरी सच के हैं। द इंस्ट्टियूट आफ चार्टर्ड एकाउंटेट आफ इंडिया के सभागार में हुए इस उत्सव का शुभारंभ आई सी ए आई के चैयरमेन सीo एo राजेन्द्र सिंह ढिल्लों, सेक्रेट्री सीo एo मोहित अग्रवाल ने दीप प्रज्वलन के साथ किया। शहर के वरिष्ठ साहित्यकार, रंगकर्मी रहे ज्योति संग को समर्पित इस नाट्य महोत्सव में पांच अलग-अलग नाटकों का मंचन होगा।
नाटक की शुरूआत होती है कश्मीर की पृष्ठभूमि से, जहां अब्दुल एक डाॅक्टर को दूर-दराज स्थित अपने घर में अपने बच्चे का इलाज करने के लिए ले जाता है। घर पहुंच कर जब डाॅक्टर को पता चलता है कि दरअसल जिस बच्चे का वह इलाज करने आया है, वह कोई वास्तविक बच्चा न होकर एक गुड़िया है तो कहानी नया मोड़ लेती है।
वह कई बार उस घर से बाहर जाना चाहता है लेकिन कहानी इस तरह मोड़ लेती रहती है कि वह चाह कर भी नहीं जा पाता। अंत में उसे पता चलता है कि उनका होने वाला बच्चा आतंकवाद के चलते मारा जाता है जिसके बाद उसकी पत्नी एक पत्थर की गुड़िया को अपना बच्चा मानने लगती है। अंत में डाॅक्टर दर्शकों को यही संदेश देता है कि किसी भी सच को मानने की नींव उसकी बुनियाद ही होती है। अगर आप किसी को सच मानते हैं तो वह आपके जीने के लिए सही साबित हो सकता है। रमन छंजोतरा, भारती और अंकुश शर्मा के अभिनय से यह नाटक लोगों को झकझोरने पर मजबूर कर देता है।




