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कश्मीर की पेपरमेशी कला के मुरीद हुए लोग

-गुलाम मोही-उद-दीन डार को पेपर मैशी पर शिल्पकारी के लिए वस्त्र मंत्रालय केंद्र -सरकार से मिल चुका है राष्ट्रीय श्रेष्ठता प्रमाण पत्र -अखरोट की लकड़ी से बनाए खिलौने व लैंप आ रहे पसंद

फरीदाबाद, 05 फरवरी।
सूरजकुंड मेला में कश्मीर की पेपरमेशी कला को देखकर पर्यटक शिल्पकारों के मुरीद हो रहे हैं। यह कश्मीर की 15वीं शताब्दी की पारंपरिक कला है जिसमें कागज की लुगदी, कपड़े व भूसे को सांचे में मिलाकर बक्से, गुलदस्ते व अन्य वस्तुएं बनाई जाती है और हाथ से जटिल पेंटिंग से तैयार किया जाता है। इसी कला को भव्य रूप देते हुए अलग-अलग वस्तुओं के साथ मेला में स्टॉल नंबर 1205 के अवॉर्डी गुलाम मोही-उद-दीन डार पहुंचे हैं।

कश्मीर के गुलाम मोही-उद-दीन डार को पेपर मेशी कला के लिए वस्त्र मंत्रालय से मिला सम्मान।

गुलाम मोही-उद-दीन डार ने बताया कि कश्मीरी पेपर मैशी प्राचीन शिल्पकला को देशभर में काफी पसंद किया जाता है। सूरजकुंड मेला में भी उनके द्वारा तैयार किए फ्रेम, लैंप सहित अन्य सजावटी सामान पर्यटकों को पसंद आ रहे हैं। इसके अलावा अखरोट की लकड़ी से बच्चों के खिलौने भी काफी पसंद किए जा रहे हैं। पेपर मेशी कला से भी अनेक वस्तुएं तैयार कर उन्हें जटिल पेंटिंग से आकर्षक रूप दिया गया है।
गुलाम मोही ने बताया कि पेपर मेशी कला के लिए 2017 में उन्हे वस्त्र मंत्रालय केंद्र सरकार की ओर से राष्ट्रीय श्रेष्ठता प्रमाण पत्र से सम्मानित भी किया जा चुका है। उन्होंने सूरजकुंड मेला में की गई शानदार व्यवस्थाओं के लिए हरियाणा सरकार व पर्यटन निगम का आभार जताते हुए सूरजकुंड मेला प्रशासन की भी सराहना की।

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