Cultural EventEntertainmentEventsFaridabadHaryanaIndiaInternational MelaShilp MelaSurajkundWorld
सूरजकुंड क्राफ्ट मेले में हरियाणवी पगड़ी बनी पर्यटकों की पहली पसंद
पगड़ी बंधाओ, फोटो खिंचाओ के माध्यम से हजारों लोग बंधवा चुके हैं हरियाणवी पगड़ी

फरीदाबाद।
अंतर्राष्ट्रीय सूरजकुंड क्राफ्ट मेले फरीदाबाद में विरासत द हेरिटेज विलेज द्वारा स्थापित किए गए हरियाणा के ‘अपणा घर’ में हरियाणवी पगड़ी पर्यटकों के लिए पहली पसंद बनी हुई है। यहां पर पगड़ी बंधाओ, फोटो खिंचाओ के माध्यम से अब तक हजारो लोग हरियाणवी पगड़ी बंधवा चुके हैं। विरासत के संयोजक डॉ. महासिंह पूनिया ने बताया कि हरियाणवी पगड़ी हरियाणा की आन-बान एवं शान का प्रतीक है। सन् 2016 से ‘अपणा घर’ के माध्यम से हरियाणा की लोक संस्कृति को लाखो लोगों तक पहुंचाया जा सका है। उन्होंने कहा कि मेले में जो भी मुख्य मेहमान आता है उसका स्वागत हरियाणवी पगड़ी के साथ किया जाता है।
डॉ. पूनिया ने बताया कि मेले में अपणा घर के अंदर हरियाणा की पगड़ी के अलग-अलग स्वरूप दर्शाए गए हैं ताकि युवा पीढ़ी हरियाणा की विरासत का प्रतीक हरियाणवी पगड़ी के विविध स्वरूपों से युवा पीढ़ी रूबरू हो सके। भारत के उप-राष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन, हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी का हरियाणवी पगड़ी के साथ उद्घाटन समारोह में स्वागत किया गया था। डॉ. पूनिया ने जानकारी देते हुए कहा कि हरियाणा की पगड़ी का इतिहास अत्यंत पुराना हैं। यहां पर क्षेत्र के अनुसार पगड़िया बांधने की परम्परा है। ब्रज की पगड़ी अहीरवाल की पगड़ी, खादर की पगड़ी, बांगर की पगड़ी, मेवात की पगडी, बांगड की पगड़ी यहां की भौगोलिक विविधता को समेटे हुए है। इसके अनुसार हरियाणा में बिश्नोई पगड़ी, राजपूत पगड़ी, अहीर पगड़ी भी विशेष रूप से प्रसिद्ध मानी जाती है। उन्होंने बताया कि पगड़ी की शुरूआत भगवान् शिव की जटाओं से हुई। बाद में युद्ध के समय लोगों ने अपने सिर को सुरक्षा कवच के रूप में पगड़ी से बांधना शुरू किया और धीरे-धीरे पगड़ी लोकजीवन में मान-सम्मान का प्रतीक बन गई।
अंतर्राष्ट्रीय सूरजकुंड क्राफ्ट मेले फरीदाबाद में विरासत द हेरिटेज विलेज द्वारा स्थापित किए गए हरियाणा के ‘अपणा घर’ में हरियाणवी पगड़ी पर्यटकों के लिए पहली पसंद बनी हुई है। यहां पर पगड़ी बंधाओ, फोटो खिंचाओ के माध्यम से अब तक हजारो लोग हरियाणवी पगड़ी बंधवा चुके हैं। विरासत के संयोजक डॉ. महासिंह पूनिया ने बताया कि हरियाणवी पगड़ी हरियाणा की आन-बान एवं शान का प्रतीक है। सन् 2016 से ‘अपणा घर’ के माध्यम से हरियाणा की लोक संस्कृति को लाखो लोगों तक पहुंचाया जा सका है। उन्होंने कहा कि मेले में जो भी मुख्य मेहमान आता है उसका स्वागत हरियाणवी पगड़ी के साथ किया जाता है।
डॉ. पूनिया ने बताया कि मेले में अपणा घर के अंदर हरियाणा की पगड़ी के अलग-अलग स्वरूप दर्शाए गए हैं ताकि युवा पीढ़ी हरियाणा की विरासत का प्रतीक हरियाणवी पगड़ी के विविध स्वरूपों से युवा पीढ़ी रूबरू हो सके। भारत के उप-राष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन, हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी का हरियाणवी पगड़ी के साथ उद्घाटन समारोह में स्वागत किया गया था। डॉ. पूनिया ने जानकारी देते हुए कहा कि हरियाणा की पगड़ी का इतिहास अत्यंत पुराना हैं। यहां पर क्षेत्र के अनुसार पगड़िया बांधने की परम्परा है। ब्रज की पगड़ी अहीरवाल की पगड़ी, खादर की पगड़ी, बांगर की पगड़ी, मेवात की पगडी, बांगड की पगड़ी यहां की भौगोलिक विविधता को समेटे हुए है। इसके अनुसार हरियाणा में बिश्नोई पगड़ी, राजपूत पगड़ी, अहीर पगड़ी भी विशेष रूप से प्रसिद्ध मानी जाती है। उन्होंने बताया कि पगड़ी की शुरूआत भगवान् शिव की जटाओं से हुई। बाद में युद्ध के समय लोगों ने अपने सिर को सुरक्षा कवच के रूप में पगड़ी से बांधना शुरू किया और धीरे-धीरे पगड़ी लोकजीवन में मान-सम्मान का प्रतीक बन गई।
अंतर्राष्ट्रीय सूरजकुंड क्राफ्ट मेले में हरियाणवी पगड़ी सभी पर्यटकों की पहली पसंद बनी हुई है। इतना ही नहीं सभी पर्यटको को अपनी ओर आकर्षित कर युवाओं को संस्कृति से जोड़ने का आह्वान भी कर रही है।





