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एसआरएस रेजिडेंसी फरीदाबाद एवं सतयुग दर्शन संगीत कला केंद्र के संयुक्त तत्वाधान में सरस्वती पूजा का आयोजन किया गया

दिनांक 5 फरवरी 2022 को B P T P स्थित S R S रेजीडेंसी में सतयुग संगीत कला केंद्र द्वारा बसंत पंचमी सरस्वती पूजा का आयोजन किया गया। जिसमें नन्हें मुन्ने बच्चों ने भाग लिया ।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि आर पी हंस एवं प्रेसिडेंट मिस्टर विनीत सिंगला एवं कंचन भट्ट , प्राचार्य श्री दीपेंद्र कांत द्वारा किया गया ।
सभी अतिथियों को पुष्प गुच्छ भेंट किये गए तत्पश्चात दीप प्रज्वलन प्रक्रिया को पूर्ण करने के पश्चात मां सरस्वती के चरणों में विद्यार्थियों द्वारा सरस्वती वंदना एवं अन्य गीतों की प्रस्तुति दी गई।
विद्यार्थियों द्वारा कार्यक्रम के मध्य में सुर- ताल कचहरी पेश की गई जिसमें हारमोनियम पर मन्नत- मेहक एवं विकास के साथ तबले पर चंद्रमौली ने संगत की इनकी जुगलबंदी ने लोगों को तालियां बजाने पर मजबूर कर दिया।
मुख्य अतिथि आर पी हंस ने सभी कार्यकर्ताओं एवं बच्चों को बसंत पंचमी की हार्दिक शुभकामनाएं दी।

एसआरएस रेजिडेंसी फरीदाबाद एवं सतयुग दर्शन संगीत कला केंद्र के संयुक्त तत्वाधान में सरस्वती पूजा का आयोजन
सरस्वती पूजा का आयोजन

कार्यक्रम के मध्य में प्रधानाचार्य दीपेंद्र कांत ने अपने संबोधन में सभी विद्यार्थियों को वसंत त्यौहार मनाने के कारण बताते हुए कहा कि बसंत पंचमी को ज्ञान पंचमी भी कहते हैं। शास्त्रों के अनुसार बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती का जन्म हुआ था। आज के दिन ज्ञान और वाणी की देवी माँ सरस्वती की विधि पूर्वक पूजा की जाती है। माँ सरस्वती की कृपा से ही व्यक्ति को ज्ञान बुद्धि विवेक के साथ विज्ञान, कला और संगीत में महारत हासिल करने का आशीष मिलता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार ज्ञान और वाणी की देवी माँ सरस्वती माघ मांस के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को ही ब्रहमा जी के मुख से प्रकट हुई थी । इस वजह से ही बसंत पंचमी के दिन सरस्वती पूजा करने का विधान है। ऐसी मानते हैं कि इस दिन आराधना करने से ही माता सरस्वती जल्दी प्रसन्न होती हैं। बसंत पंचमी का दिन शिक्षा प्रारंभ करने, नई विधि, नई विद्या, कला संगीत आदि सीखने के लिए श्रेष्ठ माना जाता है। छोटे बच्चों को इस दिन अक्षर ज्ञान कराया जाता है।

पौराणिक कथाओं के अनुसार सृष्टि के रचनाकार भगवान ब्रह्मा ने जब संसार को बनाया, पेड़-पौधे और जीव-जंतु सब कुछ दिख रहा था लेकिन किसी चीज की कमी महसूस हो रही थी इस कमी को पूरा करने के लिए उन्होंने अपने कमंडल से जल निकालकर छिड़का तो सुंदर स्त्री के रूप में देवी प्रकट हुई उनके हाथ में वीणा और दूसरे हाथ में पुस्तक थी, तीसरे में माला और चौथा हाथ में जीना बजाया तो संसार की हर चीज में स्वाहा गया इससे उन का नाम पड़ा देवी सरस्वती।
यह दिन था बसंत पंचमी का तब से बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती की पूजा होने लगी ।
अतः सभी को भी वीणा वादिनी सरस्वती स्वर, ताल, विद्या, धन आदि प्रदान करें।

इसी आशा के साथ इस कार्यक्रम का समापन हुआ। कार्यक्रम का संचालन पंडित केशव शुक्ला ने किया इसके अतिरिक्त कार्यक्रम में मिस्टर संजय बिडलान आदि लोग उपस्थित रहे ।

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