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नाट्य कार्यशाला के समापन पर बच्चों ने दिखाए नाटक

कला एवं सांस्कृतिक कला विभाग के सहयोग से आयोजित हो रही 20 दिवसीय प्रस्तुतिपरक् नाट्य कार्यशाला का समापन हो गया। इस अवसर पर ज़िला बाल कल्याण परिषद की सहायता से बाल भवन के सभागार में बच्चों ने नाटकों का प्रदर्शन किया। फोर्थ वाॅल प्रोडक्शंस और बैठानिया सेंटर की तरफ़ से आयोजित हुई इस नाट्य कार्यशाला में प्रतिभाग कर रहे बच्चों ने रंगमंच की बारीकियां सीखते हुए नाटक की प्रस्तुति तैयार की। इस कार्यशाला और नाटक के निर्देशक डाॅ0 अंकुश शर्मा और सह-निर्देशक दीपक पुष्पदीप थे।

इस अवसर पर ज़िला बाल कल्याण अधिकारी एस0 आई0 खत्री, मिशन जाग्रति के अध्यक्ष परवेज़ मलिक, अजय गर्ग, नवदुर्गा ज्योतिष संस्थान के विवेक जैन  व वरिष्ठ रंगकर्मी ब्रज मोहन ने दीप प्रज्वलित करके कार्यक्रम की शुरूआत की। खत्री जी ने कहा कि बाल भवन का द्वार सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए हमेशा खुला है और आगे भी ऐसे कार्यक्रम आयोजित किए जाते रहेंगे।

आज़ादी – एक सच नामक इस नाटक की शुरूआत गांधी जी को दक्षिण अफ्रीका में ट्रेन के डिब्बे से बाहर धक्का देने पर होती है। इसके बाद नाटक में दिखाया जाता है कि दो बच्चे मोहन और मोहिनी सुबह-सवेरे दूध की लाइन में सबसे आगे लगे हुए हैं और खुश हैं कि आज सबसे पहले दूध वही लेंगे। कुछ ही देर में एक पुलिस वाला पीछे से आता है और लाइन में लगे हुए सभी लोगों को धकेलते हुए सबसे आगे आ जाता है। पुलिस वाले से डर कर लाइन में खड़ा कोई भी आदमी उसे कुछ नहीं बोलता लेकिन मोहन-मोहिनी उसे टोक देते हैं। इस बात पर गुस्सा होकर पुलिस वाला उन दोनों को थप्पड़ मार देता है। इसके बाद नाटक में दोनों बच्चे कुछ ऐसा कर गुज़रते हैं कि पुलिस वाले को शर्मिंदा होकर सभी के सामने माफ़ी मांगनी पड़ती है। अपने आपको सबके सामने बेकसूर घोषित करके ही मोहन-मोहिनी को असली आज़ादी का अहसास होता है।

वहीं इस अवसर पर रमन छंजोतरा ने प्रेमचंद की कहानी बूढ़ी काकी पर आधारित नाटक का निर्देशन किया, जिसमें समाज की विसंगतियों को दिखाया गया है। बूढ़ा हो जाने पर घर के सभी लोग काकी से बुरा व्यवहार करने लगते हैं। घर में आयोजित विवाह समारोह में बूढ़ी काकी मेहमानों के सामने पूड़ियां खाने लगती है, जिस पर घर वाले शर्मिंदगी महसूस करते हैं। वहीं घर का सबसे छोटा बच्चा काकी के लिए पूड़ियां छिपा कर ले जाता है। इस तरह समाज में बड़े-बुजुर्गों से हो रहे व्यवहार पर कटाक्ष किया गया है।

आज़ादी – एक सच, नाटक में मंच पर मोहन की भूमिका अचल शर्मा, मोहिनी का रोल सायशा, पुलिस वाले की भूमिका दक्ष, गांधी जी का रोल प्रेम और यश, मां के रोल में पिंकी, नेरेटर की भूमिका में मान्या और जान्हवी, बच्चों के नेता के रूप में एकता और अन्य रोल में यशराज, अमित, प्रतिज्ञा, आस्था, अक्षरा, लक्ष्य और निहाल थे। वहीं, बूढ़ी काकी नाटक में भारती यादव, प्रीति मल्होत्रा, अभय, श्याम सुन्दर, अभिषेक, नितिन, कुलदीप, रतन, परि, चिरंजीव और युवराज ने भूमिका निभाई।

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