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यूपी के मूंज-काश हस्तशिल्प अपने उत्पादों को मेले में कर रहे प्रदर्शित

महिलाओं को मिल रहा रोजगार और आत्मनिर्भरता

फरीदाबाद, 5 फरवरी।
39वें अंतरराष्ट्रीय आत्मनिर्भर शिल्प मेला में देश के विभिन्न राज्यों से आए कारीगर अपनी पारंपरिक कला और हस्तशिल्प का उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहे हैं। इसी कड़ी में थीम स्टेट उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले से आए शिल्पकार मुनेन्द्र कुमार स्टॉल नंबर 312 पर मूंज और काश से बने पारंपरिक उत्पाद प्रदर्शित कर रहे है, जो आकर्षण का केंद्र बने हुए है।
शिल्पकार मुनेन्द्र कुमार ने बताया कि उनके पास करीब 30 से 35 प्रकार के हस्तनिर्मित आइटम उपलब्ध हैं, जिनकी कीमत 150 रुपए से लेकर 1200 रुपए तक रखी गई है, ताकि हर वर्ग के लोग इन उत्पादों को आसानी से खरीद सकें। उन्होंने जानकारी दी कि ये सभी उत्पाद नदियों के किनारे उगने वाली मूंज और काश घास से तैयार किए जाते हैं, जो पूरी तरह प्राकृतिक, टिकाऊ, मजबूत और पर्यावरण के अनुकूल हैं।
मुनेन्द्र कुमार ने बताया कि इस कार्य को डालिमिया ग्रुप द्वारा संगठित रूप से बढ़ावा दिया जा रहा है। इस समूह से लगभग 250 ग्रामीण महिलाएं जुड़ी हुई हैं, जो इन हस्तशिल्प उत्पादों के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। यह कार्य महिलाओं को आत्मनिर्भर, स्वरोजगार और महिला सशक्तिकरण का अवसर प्रदान कर रहा है।
पारंपरिक कला और आधुनिक उपयोगिता का अनूठा संगम
स्टॉल पर मूंज और काश से बने फल टोकरी, पूजा डोर, कैस रोल, फ्लावर पॉट, पूजा थाल, फैंसी डलिया, लॉन्ड्री बास्केट, पोस्टर ,डोरी बास्केट, राउंड ट्रे, सजावटी टोकरियां, घरेलू भंडारण टोकरी, हैंडमेड ट्रे, पूजा सामग्री धारक, सजावटी बास्केट सहित अनेक आकर्षक और उपयोगी उत्पाद हैं। इन उत्पादों में पारंपरिक शिल्पकला, आधुनिक डिजाइन और उपयोगिता का सुंदर मेल देखने को मिल रहा है।

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