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आज़ादी के संग्राम में हिन्दी नाटकों ने निभाई विशेष भूमिका

आज़ादी का अमृत महोत्सव के उपलक्ष्य में हरियाणा साहित्य अकादमी के सहयोग से रंगमंच पर एक सेमिनार का आयोजन किया गया। फोर्थ वॉल प्रोडक्शंस द्वारा आयोजित यह सेमिनार ‘आज़ादी के संग्राम में हिन्दी नाटकों का योगदान‘ विषय पर आधारित था। राजकीय सीनियर सेकेंडरी स्कूल, चंदावली में आयोजित हुए इस सेमिनार में बच्चों तथा आमंत्रित अतिथियों ने आज़ादी दिलाने में हिन्दी नाटकों की भूमिका के बारे में जाना। इस कार्यक्रम का संचालन श्री चमन प्रकाश ने किया।

इस सेमिनार में विशिष्ट वक्ता के तौर पर वरिष्ठ रंगकर्मी ज्योति संग ने कहा कि किसी भी संग्राम में नाटकों की विशेष भूमिका रही है। हमारे देश को आज़ादी दिलाने में ऐसे अनेकों लेखकों, रंगकर्मियों, अभिनेताओं का योगदान रहा है, जिन्होंने अपने नाटकों से अंग्रेजों की सत्ता हिलाने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी थी। अंग्रेजों ने अनेक नाटकों पर रोक लगाई और उन्हें करने वाले कलाकारों को जेल में डाल दिया। वहीं, वक्ता डॉ0 अंकुश शर्मा ने कहा कि अंग्रेज नाटकों को उनके खिलाफ़ इतना सषक्त माध्यम मानते थे कि उन्होंने 1876 में ड्रैमेटिक परफार्मेंस एक्ट तक लागू कर दिया, जिसके अनुसार सरकार को किसी नाट्यालेख या प्रदर्शन पर पाबन्दी लगाने का अधिकार मिल गया।

इसके साथ ही बतौर वक्ता रंगकर्मी श्री आनन्द भाटी ने कहा कि ऐसे कई नाटककार हुए हैं जिनके नाटकों से डर कर सरकार ने उन्हें जब्त कर लिया था। इसके साथ ही वरिष्ठ प्रवक्ता श्री मोहम्मद इकबाल ने भी इस विषय पर अपने विचार रखते हुए कला एवं साहित्य को मनुष्य के विकास में अत्यंत उपयोगी बताया। वहीं, इस सेमिनार की संयोजक प्रधानाचार्य बिमलेश वशिष्ठ ने भी इस विषय से सम्बन्धित जानकारी भी ली और बच्चों व आमंत्रित अतिथियों ने इस विषय से सम्बन्धित प्रश्न भी पूछे। अंत में रंगकर्मी श्री दीपक पुष्पदीप ने हरियाणा साहित्य अकादमी द्वारा आयोजित इस सेमिनार में आने के लिए सभी का धन्यवाद करते हुए अन्य विषयों पर भी सेमिनार आयोजित करने के बारे में बताया।

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