EntertainmentEventsFaridabadHaryanaIndiaWorld

सूरजकुंड मेले में पर्यटकों का ध्यान खींच रहे उत्तर प्रदेश और मेघालय पवेलियन

- 39वें सूरजकुंड अंतर्राष्ट्रीय शिल्प मेला में थीम स्टेट हैं उत्तर प्रदेश और मेघालय

फरीदाबाद, 2 फरवरी।
सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय शिल्प मेला अपनी सांस्कृतिक विविधता और पारंपरिक कला के लिए देश-विदेश में प्रसिद्ध है। विश्वविख्यात सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय आत्मनिर्भर शिल्प मेले में इस वर्ष थीम स्टेट उत्तर प्रदेश और मेघालय पवेलियन विशेष रूप से पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। पवेलियन में दोनों राज्यों की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, हस्तशिल्प, खानपान और लोक कलाओं की झलक देखने को मिल रही है, जिससे बड़ी संख्या में लोग यहां पहुंच रहे हैं।

उत्तर प्रदेश पवेलियन को पारंपरिक स्थापत्य शैली में सजाया गया है, जहां प्रवेश करते ही आगंतुकों को प्रदेश की ऐतिहासिक और आध्यात्मिक पहचान का अनुभव होता है। पवेलियन में अयोध्या द्वार, काशी द्वार सहित अन्य द्वार, बनारसी साडिय़ा, सहारनपुर की लकड़ी की नक्काशी और भदोही के कालीन जैसे प्रसिद्ध उत्पाद प्रदर्शित किए गए हैं। स्टॉल पर मौजूद हस्तनिर्मित वस्तुओं को देखने और खरीदने के लिए पर्यटकों में खासा उत्साह देखा जा रहा है।

NewsMBR
NewsMBR

इसके अलावा, पवेलियन में उत्तर प्रदेश के पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद भी लोगों को खूब लुभा रहा है। आगंतुक यहां स्थानीय पकवानों का आनंद ले रहे हैं। सांस्कृतिक मंच पर समय-समय पर लोकनृत्य और संगीत प्रस्तुतियां आयोजित की जा रही हैं, जो प्रदेश की लोक परंपराओं को जीवंत बना रही हैं। पर्यटकों का कहना है कि उत्तर प्रदेश पवेलियन उन्हें एक ही स्थान पर राज्य की कला, संस्कृति और परंपराओं से परिचित करा रहा है। वहीं, कारीगरों और शिल्पकारों के लिए यह मेला अपने उत्पादों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने का महत्वपूर्ण अवसर साबित हो रहा है। सूरजकुंड मेले में उत्तर प्रदेश पवेलियन न केवल राज्य की सांस्कृतिक समृद्धि को प्रदर्शित कर रहा है, बल्कि ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना को भी साकार कर रहा है। यही कारण है कि यह पवेलियन मेले में आने वाले हर पर्यटक की पसंदीदा जगह बनता जा रहा है।

मेघालय की पहचान उसके बेंत और बांस के हस्तशिल्प, रेशम बुनाई तथा सोने-चांदी के पारंपरिक आभूषणों से भी जुड़ी है। पवेलियन में इन कलाओं का प्रदर्शन न केवल राज्य की समृद्ध परंपरा को दर्शाता है, बल्कि ‘लोकल टू ग्लोबल’ की भावना को भी सशक्त बनाता है। सूरजकुंड मेले में मेघालय पवेलियन प्रकृति, संस्कृति और शिल्प का अनूठा संगम प्रस्तुत कर रहा है, जो हर आयु वर्ग के पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है।

यहां आने वाले पर्यटक मेघालय की मनमोहक छटा से परिचित हो रहे हैं, जिससे भविष्य में इस राज्य की यात्रा करने की उत्सुकता भी बढ़ रही है। मेघालय, जिसे बादलों का घर कहा जाता है, अपनी लुभावनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए विश्व भर में प्रसिद्ध है। पवेलियन के माध्यम से पर्यटन विभाग देश-विदेश से आए पर्यटकों को राज्य की सांस्कृतिक विविधता और हस्तशिल्प कला से अवगत कराने के साथ मेघालय आने का निमंत्रण भी दे रहा है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button