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अंतर्राष्ट्रीय सूरजकुंड मेले में रामकृष्ण वैद्य की अनोखी लकड़ी व जीरा घास कला बनी पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र

अनूठी शिल्पकला से पर्यटकों का ध्यान आकर्षित कर रहे हैं रामकृष्ण वैद्य

सूरजकुंड (फरीदाबाद)।
39 वें सूरजकुंड अंतरराष्टï्रीय आत्मनिर्भर शिल्प महोत्सव में इस वर्ष भी देशभर से आए शिल्पकार अपनी परंपरागत और आधुनिक कलाओं का शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं। इसी कड़ी में स्टॉल नंबर-283 पर दिल्ली के गोल मार्केट से आए रामकृष्ण वैद्य अपनी अनूठी शिल्प कला के कारण दर्शकों और पर्यटकों का ध्यान आकर्षित कर रहे हैं।
रामकृष्ण वैद्य ने बताया कि वे वर्ष 2017 से लगातार सूरजकुंड मेले में भाग ले रहे हैं और हर वर्ष अपने नए व नवाचारी उत्पादों के साथ आगंतुकों का स्वागत करते हैं। उन्होंने बताया कि उनके स्टॉल पर लगभग 40 से 50 प्रकार के हस्तनिर्मित आइटम उपलब्ध हैं, जिनमें पारंपरिक कला और आधुनिक होम डेकोरेशन का सुंदर समन्वय देखने को मिलता है। उनकी सबसे विशेष और अनोखी पहचान सोला की लकड़ी से बनाई गई कलात्मक तस्वीरें हैं। इन तस्वीरों को तैयार करने में उच्च गुणवत्ता की लकड़ी का उपयोग किया जाता है, जिससे प्रत्येक कलाकृति एक विशिष्ट पहचान बनाती है। रामकृष्ण वैद्य ने बताया कि लकड़ी पर की गई बारीक कारीगरी पर्यटकों को विशेष रूप से आकर्षित कर रही है और यह उनकी स्टॉल की सबसे अधिक मांग वाली वस्तुओं में शामिल है।
इसके अतिरिक्त वे समुद्र के किनारे पाई जाने वाली विशेष घास, जिसे जीरा घास’ कहा जाता है, से भी आकर्षक सजावटी सामग्री तैयार करते हैं। इस प्राकृतिक सामग्री से बनाए गए उत्पाद न केवल पर्यावरण के अनुकूल हैं, बल्कि घरों की सजावट को एक अनोखा और पारंपरिक रूप भी प्रदान करते हैं।

उनके स्टॉल पर होम डेकोरेशन आइटम, दीवार हैंगिंग, लकड़ी की कलाकृतियां, सजावटी शोपीस, हस्तनिर्मित सजावट सामग्री सहित अनेक प्रकार के उत्पाद उपलब्ध हैं। उन्होंने बताया कि उनके उत्पादों की कीमत मात्र 30 रुपए से लेकर 250 रुपए तक रखी गई है, जिससे हर वर्ग के लोग इन आकर्षक वस्तुओं को खरीद सकते हैं। रामकृष्ण वैद्य ने बताया कि वे केवल उत्पादों की बिक्री तक सीमित नहीं हैं, बल्कि शिक्षा और कला के प्रचार-प्रसार में भी सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। वे विभिन्न स्कूलों में जाकर बच्चों को लकड़ी से बनी कलाकृतियों और डेकोरेशन सामग्री के बारे में जानकारी देते हैं और उन्हें पारंपरिक हस्तशिल्प से जोड़ने का कार्य कर रहे हैं। इससे बच्चों में रचनात्मकता बढ़ने के साथ-साथ भारतीय कला और संस्कृति के प्रति रुचि भी विकसित हो रही है। उन्होंने यह भी बताया कि उनके साथ कई कुशल कर्मचारी कार्यरत हैं, जो इस कला को जीवित रखने और इसे आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। उनके स्टॉल पर कार्यरत टीम दिन-रात मेहनत कर प्रत्येक उत्पाद को बेहतरीन गुणवत्ता और आकर्षक डिजाइन के साथ तैयार करती है।
अंतरराष्ट्रीय सूरजकुंड मेले में रामकृष्ण वैद्य का स्टॉल पारंपरिक शिल्प, प्राकृतिक सामग्री और आधुनिक सजावट का एक उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत कर रहा है। पर्यटकों और कला प्रेमियों के लिए यह स्टॉल न केवल खरीदारी का स्थान है, बल्कि भारतीय हस्तशिल्प की समृद्ध परंपरा को करीब से देखने और समझने का अवसर भी प्रदान करता है। उन्होंने सूरजकुंड मेला में उपलब्ध करवाई गई बेहतर सुविधाओं के लिए हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और पर्यटन मंत्री डा. अरविंद कुमार शर्मा का आभार व्यक्त किया।
उन्होंने कहा कि मेले में आने वाले देश-विदेश के पर्यटक रामकृष्ण वैद्य की कला की सराहना कर रहे हैं और उनके उत्पादों को बड़े उत्साह के साथ खरीद रहे हैं, जिससे स्थानीय कारीगरों और पारंपरिक हस्तशिल्प को नया मंच और पहचान मिल रही है।

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