CraftEntertainmentEnvironmentEventsFaridabadHaryanaIndiaLatest NewsWorld

सूरजकुंड मेले में प्रकृति प्रेम और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दे रहे घास, बांस, लकड़ी व पत्तियों से बने घोंसले

- देखने में सुंदर और उपयोगी हैं घोसलें

फरीदाबाद, 8 फरवरी।
सूरजकुंड मेला हरियाणा के फरीदाबाद जिले में हर वर्ष फरवरी महीने में आयोजित होने वाला एक प्रसिद्ध अंतरराष्ट्रीय हस्तशिल्प मेला है। यह मेला भारत की कला, संस्कृति और पारंपरिक शिल्प को प्रदर्शित करने के लिए जाना जाता है, जहां देश-विदेश से कारीगर अपने अनोखे उत्पाद लेकर आते हैं और मेले में बेचते हैं।

सूरजकुंड में आयोजित किए जा रहे 39वें सूरजकुंड इंटरनेशनल फेस्टिवल में आकर्षक वस्तुओं में पक्षियों घोसलें भी शामिल किए गए हैं जो घोंसले केवल सजावटी वस्तुएं नहीं बल्कि प्रकृति प्रेम और पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दे रहे हैं। कारीगर इन्हें घास, बांस, लकड़ी, पत्तियों और अन्य प्राकृतिक सामग्री से बनाते हैं, जिससे ये देखने में सुंदर और उपयोगी दोनों हैं। ऐसे हस्तनिर्मित उत्पाद मेले में ग्रामीण और पारंपरिक कला की झलक प्रस्तुत करते हैं। पक्षियों के घोंसले बनाने की कला काफी धैर्य और कौशल की मांग करती है। कारीगर हर घोंसले को इस प्रकार डिजाइन करते हैं कि वह पक्षियों के लिए सुरक्षित और आरामदायक हो। कई घोंसले घरों की सजावट के लिए बनाए जाते हैं, जबकि कुछ विशेष रूप से बगीचों और पेड़ों पर टांगने के लिए होते हैं। इन घोंसलों को खरीदकर लोग न केवल अपने घर की शोभा बढ़ाते हैं, बल्कि पक्षियों को रहने का स्थान भी प्रदान करते हैं। सूरजकुंड मेले में पक्षियों के घोंसले भारतीय शिल्पकारों की रचनात्मकता और प्रकृति के प्रति उनके प्रेम का प्रतीक हैं। ये हमें सिखाते हैं कि आधुनिक जीवन के बीच भी हमें प्राकृतिक संतुलन बनाए रखना चाहिए और छोटे-छोटे प्रयासों से पक्षियों और पर्यावरण की रक्षा करनी चाहिए।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button