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चेहरे के हाव-भाव दर्शकों पर छोड़ते हैं प्रभाव

 

कला एवं सांस्कृतिक कार्य विभाग, हरियाणा के सहयोग से आयोजित हो रही नाट्य कार्यशाला का शुभारंभ हो चुका है। इस कार्यशाला में प्रतिभाग कर रहे बच्चे रंगमंच के गुर सीख रहे हैं और अपनी इस प्रतिभा को वह कार्यशाला के समापन पर होने वाले एक नाटक में दिखाएंगे। रंगमंच एक ऐसी विधा है, जिसमें बच्चे खेल-खेल में अनुशासन, समय का प्रबंधन, टीम वर्क जैसी ऐसी बातें आसानी से सीख जाते हैं जो उनके जीवन में काफ़ी उपयोगी साबित होती हैं।

इस कार्यशाला में प्रतिभाग कर रहे बच्चों ने नाटक की तैयारी के लिए चेहरे के हाव-भाव के बारे में सीखा। उन्होंने जाना कि हमारा चेहरा कई तरह के भावों को प्रकट कर सकता है। अगर सही तरीके के भाव चेहरे पर लाए जाएं तो उसका दर्शकों पर बहुत असर होता है। अगर हंसना है तो हंसी के भाव और रोना है तो उदासी के भाव चेहरे पर लाए जाने आवश्यक है। इसी तरह अलग-अलग भावों को समझते हुए उन्होंने इन भावों को प्रकट करने की भी कोशिश की। इससे पहले बच्चों ने रंगमंचीय खेल तथा गतिविधियों में भाग लिया और अलग-अलग जानवरों का अभिनय करते हुए भी उनके हाव-भाव दिखाने की कोशिश की। प्रतिदिन शाम 05ः30 बजे से 07ः30 बजे तक आयोजित होने वाली इस कार्यशाला में बच्चे अलग-अलग विशेषज्ञों से नाटक के अलग-अलग गुर सीख रहे हैं।

कार्यशाला में प्रेम शर्मा, यश शर्मा, एकता तिवारी, जानविका गुप्ता, मान्या, अचल शर्मा, दक्ष, अमित, पिंकी, प्रतिज्ञा, रिद्धी ग्रोवर, दीपिका, अभिषेक, कौशल, प्रियंका, हेमंत, कमल, आकाश आदि प्रतिभाग कर रहे हैं। इस कार्यशाला में डाॅ अंकुश शर्मा संयोजक तथा दीपक पुष्पदीप सह-निर्देशक हैं, जो आगामी दिनों में बच्चों को दो अलग-अलग नाटक सिखाएंगे।

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