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बाल विवाह निषेध अधिनियम 2006 के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन हुआ

बाल विवाह निषेध अधिनियम 2006 के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन हुआ

– चिकित्सा अधिकारियों को दिया गया अधिनियम से जुड़े कानूनी और सामाजिक पहलुओं का व्यवहारिक प्रशिक्षण

बाल विवाह निषेध अधिनियम 2006 के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन हुआ
बाल विवाह निषेध अधिनियम 2006 के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन हुआ

फरीदाबाद, 27 जून।

जिला प्रशिक्षण केंद्र (DTC), फरीदाबाद में बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006 के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर एक दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य चिकित्सा अधिकारियों को बाल विवाह निषेध अधिनियम के प्रावधानों से भली-भांति अवगत कराना, उनकी भूमिका को स्पष्ट करना और उन्हें इस सामाजिक कुरीति के उन्मूलन में प्रभावी योगदान के लिए सक्षम बनाना था।

एडीसी सतबीर मान ने बताया कि कार्यशाला में जिले की विभिन्न प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC), शहरी स्वास्थ्य केंद्रों (UHC) तथा अर्बन प्राइमरी हेल्थ सेंटर्स (UPHC) में कार्यरत 10 चिकित्सा अधिकारियों ने भाग लिया। प्रशिक्षण के दौरान उन्हें अधिनियम के कानूनी प्रावधान, बाल विवाह के सामाजिक-मानसिक प्रभाव, रिपोर्टिंग की प्रक्रिया, और समुदाय स्तर पर जागरूकता फैलाने की रणनीतियों से अवगत कराया गया।

कार्यशाला में मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) कार्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों एवं विशेषज्ञ प्रशिक्षकों ने भाग लिया। उन्होंने बताया कि बाल विवाह न केवल एक गैर-कानूनी कृत्य है, बल्कि यह बच्चों के स्वास्थ्य, शिक्षा और समग्र विकास पर गहरा प्रतिकूल प्रभाव डालता है।

प्रशिक्षकों ने केस स्टडीज, वास्तविक अनुभवों और व्यावहारिक उदाहरणों के माध्यम से प्रतिभागियों को बाल विवाह से संबंधित चुनौतियों को समझाया तथा समाधान के उपाय भी बताए। उन्होंने यह भी बताया कि कैसे चिकित्सा अधिकारी समुदाय के बीच विश्वसनीय स्रोत बनकर बाल विवाह के खिलाफ जनजागरूकता फैला सकते हैं और इस कुरीति की रोकथाम में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

इस अवसर पर अधिकारियों ने आशा व्यक्त की कि इस प्रशिक्षण के उपरांत चिकित्सा अधिकारी न केवल अधिनियम के कानूनी पहलुओं को प्रभावी ढंग से लागू कर सकेंगे, बल्कि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में समुदायों को जागरूक करने में भी अहम भूमिका निभाएंगे।

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